प्रक्रति ने हमे एक छोटे और प्यारे तोहफे के साथ
नवाजा है इस प्रक्रति ने हमे वो तोहफा दिया है जिसकी हम कामना भी न कर सके आज शाम
मे निकल पड़ा शहर की गलियों मे तभी मेरी नजर एक छोटी बच्ची पर पड़ी वो बच्ची बड़ी ही
मनमोहक और सुंदर थी वो बच्ची हस रही थी और मे उसे देख रहा था फिर वो थोड़ी देर बाद
उदास होकर बेठ गयी मैं उसके पास गया और कहा क्या हुआ खेलो उसने खेलने से मना कर
दिया शायद किसी चीज़ से रूठ गयी होगी और फिर से उन्ही बच्चो के साथ खेलने लगी उस
बच्ची के माथे पर तिलक लगा था शायद उसकी माँ ने लगया होगा उसके घुंग राले बाल थे
उसके रंग बिलकुल गाय माता के दूध के तरह सफ़ेद था मै तो उसकी तरफ देखता ही रहगया और
कर बेठा प्रक्रति और अपनी माँ का शुक्रीया मेरे ह्रदय की गहराइयो से उमड़ पड़े कुछ
इसे शब्द जिनकी वजह से मुझे बोलना पड़ गया (शुक्रिया प्रक्रति तुमने हम सब को इतना
सुन्दर बनाया है और शुक्रिया उस माँ का जिसके पेट से ये L .B जन्म लेकर आया है बस
इतना कह कर मै वहा से चला आया )और उठा लिया विज्ञानं का अविष्कार और बेठ गया लिखने
कि हमे प्रक्रति और भगवान का शक्रिया करना चाहीये जिसने हमे तुम्हे बनाया है हमे
नही भूलना चाहीये की प्रक्रति भी हमारी माँ है बल्कि हमारी माँ से बढ़ कर है क्योकि
प्रक्रति मे हे हमारी माँ साँस लेती है प्रक्रति ने दिए है अपने अंश बच्चो के रूप
मे जिन्हें कुछ लोग बेच देते है उन्हें मरते पीटते है उन बच्चो से भीक मंगवाते है
आज मे लिखता हु उन लोगो के ऊपर की कहानी इन लोगो ने प्रक्रति को भी कहर उठाने पर
मजबूर कर दिया है आज इनके कुकर्म देख कर प्रक्रति भी रो रही है और कह बठी है की जब
तक मानव जाति नही सुधरेगी तब तक मै अपने अंश इनको बच्चो के रूप मे नही दूंगी आज जो
हमारे और तुम्हारे पास छोटी बच्चिया है वो सभी प्रक्रति की देन है हमे उन पर जुलुम
न करने चाहिए बल्कि उन्हें अच्छी शिक्षा दिलानी चाहिए क्योकि आज वर्तमान मे लडको
से ज्यादा लडकिय कामयाब है आज हर छेत्र मे लडकियों की वहा वहा हो रही है और भविष्य
मे भी रहेगी अब उसके बाद हमारी उन प्रकर्ति सोन्दर्य की देन यानी हमारी वो छोट्टी
बच्चियों की शादी भी करनी पड़ेगी और शादी के बाद कुछ निरदैयी लोग बालिकाओ पर दहेज
प्रथा के हत्कड़ी बांध देते है और दहेज की अभिलाषा पर वो यहाँ वो भूल गए है की एक
उनकी भी फूल जेसी बच्ची है कल उसकी शादी होगी और उस पर भी वेसी ही मांग राखी
जायेंगी तो हमे अपनी इस भूल को शुधारना चाहिए और ईश्वर की देन को स्वीकार करना
चाहिए शायद प्रकर्ति फिर से हस पड़े और और दे दे हमे वो बहुमूल्य तोहफा फिर से
हमारी गोद मे तो कदर करे इंसानियत की और इस प्राचीन समाज जी क्रप्या इस मानव जाति
इस कड़ी को शुधारे और इस सुधरी कड़ी को बनाए
रखे
(बच्चे बहुमूल्य तोहफा है )( AK भी बच्चो से
बेहत प्यार करता है )

No comments:
Post a Comment